श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 242: आश्रमधर्मकी प्रस्तावना करते हुए ब्रह्मचर्य-आश्रमका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.242.23 
अभिवाद्य गुरुं ब्रूयादधीष्व भगवन्निति।
इदं करिष्ये भगवन्निदं चापि कृतं मया॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नमस्कार करके हाथ जोड़कर गुरु से कहो - 'प्रभो ! अब मुझे शिक्षा दीजिए । मैंने यह कार्य पूर्ण कर लिया है और अब मैं यह कार्य करूँगा ।'॥23॥
 
After saluting in this manner, with folded hands say to the Guru - 'Lord! Now please teach me. I have completed this work and I will do this work now.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)