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mahabharat 12.242.15: ये चारों आश्रम ब्रह्म में प्रतिष्ठित हैं और ब्रह्म तक पहुँचने के लिए चार चरणों वाली सीढ़ी के समान माने गए हैं। इस सीढ़ी पर चढ़कर मनुष्य ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित होता है॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 12.242: आश्रमधर्मकी प्रस्तावना करते हुए ब्रह्मचर्य-आश्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 242: आश्रमधर्मकी प्रस्तावना करते हुए ब्रह्मचर्य-आश्रमका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.242.15 
चतुष्पदी हि नि:श्रेणी ब्रह्मण्येषा प्रतिष्ठिता।
एतामारुह्य नि:श्रेणीं ब्रह्मलोके महीयते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ये चारों आश्रम ब्रह्म में प्रतिष्ठित हैं और ब्रह्म तक पहुँचने के लिए चार चरणों वाली सीढ़ी के समान माने गए हैं। इस सीढ़ी पर चढ़कर मनुष्य ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित होता है॥ 15॥
 
These four ashramas are established in Brahma and are considered to be like a ladder with four steps to reach Brahma. By climbing this ladder, a man is honoured in Brahmaloka.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)