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एको वाप्याश्रमानेतान् योऽनुतिष्ठेद् यथाविधि।
अकामद्वेषसंयुक्त: स परत्र विधीयते॥ १४॥
अनुवाद
यदि एक भी मनुष्य राग-द्वेष से रहित होकर इन आश्रमों के धर्मों का अनुष्ठान भलीभाँति करता है, तो वह तत्वतः परब्रह्म को जानने का अधिकारी हो जाता है ॥14॥
If even a single man, being void of attachment and hatred, performs the rituals of the religions of these ashrams properly, then he becomes entitled to know the Supreme God in essence. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥