Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.241.3: भीष्म कहते हैं - राजन! शुकदेव के इस प्रकार पूछने पर पराशरपुत्र भगवान व्यास ने कहा - 'पुत्र! ये कर्म और ज्ञान मार्ग क्रमशः नाशवान और अविनाशी हैं। मैं इनका वर्णन आरम्भ करता हूँ।' | mahabharat अध्याय 12.241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म कहते हैं - राजन! शुकदेव के इस प्रकार पूछने पर पराशरपुत्र भगवान व्यास ने कहा - 'पुत्र! ये कर्म और ज्ञान मार्ग क्रमशः नाशवान और अविनाशी हैं। मैं इनका वर्णन आरम्भ करता हूँ।'
Bhishma says - King! On being asked in this manner by Shukdev, Lord Vyasa, son of Parashara, replied - 'Son! These paths of action and knowledge are respectively perishable and imperishable. I am beginning to explain them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥