Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.241.17: कर्म में लिप्त मनुष्य, कर्मजनित कलाओं का भार ढोता हुआ, मन और इन्द्रियरूपी ग्यारह विकारों को लेकर जन्म लेता है। इस प्रकार वह देहधारी है। उसे तुम चन्द्रमा के समान अपने कर्मों के फलों से युक्त, वृद्धि और क्षय में तत्पर, त्रिगुणमय शरीर वाला समझो। 17॥ | mahabharat अध्याय 12.241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्म में लिप्त मनुष्य, कर्मजनित कलाओं का भार ढोता हुआ, मन और इन्द्रियरूपी ग्यारह विकारों को लेकर जन्म लेता है। इस प्रकार वह देहधारी है। उसे तुम चन्द्रमा के समान अपने कर्मों के फलों से युक्त, वृद्धि और क्षय में तत्पर, त्रिगुणमय शरीर वाला समझो। 17॥
'A man engrossed in karma, bearing the burden of the arts born out of karma, is born with eleven vices in the form of mind and senses. In this way he is an embodied person. You should consider him to be having a threefold body filled with the fruits of his actions and subject to growth and decline like the moon. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥