Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.241.14: उस अवस्था को प्राप्त हुए मनुष्यों को सुख-दुःख, द्वन्द्व, मानसिक संकल्प और कर्म-संस्कार बाधा नहीं देते। वहाँ पहुँचे हुए मनुष्य सर्वत्र समान भाव रखते हैं, सबको अपना मित्र मानते हैं और सभी जीवों के कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं। 14॥ | mahabharat अध्याय 12.241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्वन्द्वैर्न यत्र बाध्यन्ते मानसेन च कर्मणा।
समा: सर्वत्र मैत्राश्च सर्वभूतहिते रता:॥ १४॥
अनुवाद
उस अवस्था को प्राप्त हुए मनुष्यों को सुख-दुःख, द्वन्द्व, मानसिक संकल्प और कर्म-संस्कार बाधा नहीं देते। वहाँ पहुँचे हुए मनुष्य सर्वत्र समान भाव रखते हैं, सबको अपना मित्र मानते हैं और सभी जीवों के कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं। 14॥
'The people who have attained that state are not hindered by happiness-sorrow, conflict, mental resolve and karma-sanskars. The humans who have reached there have equal feelings everywhere, consider everyone as friends and remain ready for the welfare of all living beings. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥