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mahabharat 12.241.11: कर्म के फल सुख-दुःख और जन्म-मरण हैं। मनुष्य कर्म से इन वस्तुओं को प्राप्त करते हैं, परन्तु ज्ञान से उस परमपद को प्राप्त करते हैं, जहाँ पहुँचकर मनुष्य सदा के लिए दुःखों से मुक्त हो जाता है।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.241.11 
कर्मण: फलमाप्नोति सुखदु:खे भवाभवौ।
विद्यया तदवाप्नोति यत्र गत्वा न शोचति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कर्म के फल सुख-दुःख और जन्म-मरण हैं। मनुष्य कर्म से इन वस्तुओं को प्राप्त करते हैं, परन्तु ज्ञान से उस परमपद को प्राप्त करते हैं, जहाँ पहुँचकर मनुष्य सदा के लिए दुःखों से मुक्त हो जाता है।॥11॥
 
‘The results of karma are happiness, sorrow and birth and death. Humans get these things through karma, but through knowledge they attain that supreme position, where on reaching there one becomes free from sorrow forever.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)