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mahabharat 12.241.10: परंतु जिन्होंने धर्म के तत्त्व को पूर्णतः समझ लिया है और परम ज्ञान प्राप्त कर लिया है, वे कर्म की उसी प्रकार प्रशंसा नहीं करते जैसे प्रतिदिन नदी का जल पीने वाले लोग कुएँ का आदर नहीं करते॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 241: कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.241.10 
ये स्म बुद्धिं परां प्राप्ता धर्मनैपुण्यदर्शिन:।
न ते कर्म प्रशंसन्ति कूपं नद्यां पिबन्निव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
परंतु जिन्होंने धर्म के तत्त्व को पूर्णतः समझ लिया है और परम ज्ञान प्राप्त कर लिया है, वे कर्म की उसी प्रकार प्रशंसा नहीं करते जैसे प्रतिदिन नदी का जल पीने वाले लोग कुएँ का आदर नहीं करते॥10॥
 
'But those who have fully understood the essence of religion and have attained the highest knowledge, do not praise karma in the same way as people who drink the water of the river every day do not respect the well.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)