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mahabharat 12.240.8: इस प्रकार आलस्य का त्याग करके सदैव सावधानी से इन योग-संबंधी दोषों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए तथा अग्नि और ब्राह्मणों की पूजा करनी चाहिए तथा देवताओं को नमस्कार करना चाहिए ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.240.8 
एवमेतान् योगदोषान् जयेन्नित्यमतन्द्रित:।
अग्नींश्च ब्राह्मणांश्चार्चेद् देवता: प्रणमेत च॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार आलस्य का त्याग करके सदैव सावधानी से इन योग-संबंधी दोषों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए तथा अग्नि और ब्राह्मणों की पूजा करनी चाहिए तथा देवताओं को नमस्कार करना चाहिए ॥8॥
 
In this way, one should always carefully try to overcome these yoga related defects by giving up laziness. And one should worship fire and Brahmins and pay obeisance to the gods. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)