Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.240.6-7: मनुष्य को धैर्य के द्वारा अपने लिंग और उदर की रक्षा करनी चाहिए, अर्थात् विषय-भोग और भोजन की चिंता को दूर करना चाहिए। नेत्रों के द्वारा हाथ-पैरों की रक्षा करनी चाहिए, मन के द्वारा नेत्रों और कानों की रक्षा करनी चाहिए, तथा कर्मों के द्वारा मन और वाणी की रक्षा करनी चाहिए, अर्थात् उन्हें शुद्ध करना चाहिए। सावधानी के द्वारा भय का त्याग करना चाहिए और विद्वानों की संगति से अहंकार का त्याग करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृत्या शिश्नोदरं रक्षेत् पाणिपादं च चक्षुषा॥ ६॥
चक्षु:श्रोत्रे च मनसा मनोवाचं च कर्मणा।
अप्रमादाद् भयं जह्याद् दम्भं प्राज्ञोपसेवनात्॥ ७॥
अनुवाद
मनुष्य को धैर्य के द्वारा अपने लिंग और उदर की रक्षा करनी चाहिए, अर्थात् विषय-भोग और भोजन की चिंता को दूर करना चाहिए। नेत्रों के द्वारा हाथ-पैरों की रक्षा करनी चाहिए, मन के द्वारा नेत्रों और कानों की रक्षा करनी चाहिए, तथा कर्मों के द्वारा मन और वाणी की रक्षा करनी चाहिए, अर्थात् उन्हें शुद्ध करना चाहिए। सावधानी के द्वारा भय का त्याग करना चाहिए और विद्वानों की संगति से अहंकार का त्याग करना चाहिए।
With the help of patience, a man should protect his penis and abdomen, i.e., he should eliminate the worries of sensual pleasures and food. With the help of eyes, he should protect his hands and feet, with the help of mind, he should protect his eyes and ears, and with the help of actions, he should protect his mind and speech, i.e., he should purify them. With caution, he should give up fear and with the company of learned persons, he should give up arrogance. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥