Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.240.36: जो लोग महर्षि महात्मा व्यास द्वारा दिए गए इस उपदेश पर यथार्थ रूप से मन में विचार करते हैं और उसे अच्छी तरह समझकर उसके अनुसार आचरण करते हैं, वे ज्ञानी पुरुष ब्रह्माजी की समता को प्राप्त होते हैं और प्रलयकाल तक ब्रह्मलोक में ब्रह्माजी के साथ रहकर अंत में उन्हीं के साथ मुक्त हो जाते हैं ॥36॥ | mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग महर्षि महात्मा व्यास द्वारा दिए गए इस उपदेश पर यथार्थ रूप से मन में विचार करते हैं और उसे अच्छी तरह समझकर उसके अनुसार आचरण करते हैं, वे ज्ञानी पुरुष ब्रह्माजी की समता को प्राप्त होते हैं और प्रलयकाल तक ब्रह्मलोक में ब्रह्माजी के साथ रहकर अंत में उन्हीं के साथ मुक्त हो जाते हैं ॥36॥
Those who think in their mind on this advice given by Maharishi Mahatma Vyas as per the exact form and understand it well and behave accordingly, those wise men attain the equality of Brahmaji and by staying with Brahmaji in Brahmalok till the time of destruction, they are finally liberated with him. 36॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकानुप्रश्ने चत्वारिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका अनुप्रश्नविषयक दो सौ चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥