Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.240.31: यदि तुम्हें कुछ प्राप्त हो जाए तो अति प्रसन्न मत हो और यदि कुछ न मिले तो भी चिन्ता मत करो। सब प्राणियों के प्रति समभाव रखो। यद्यपि तुम वायु के समान सर्वत्र विचरण करते हो, फिर भी तुम्हें अनासक्त और निर्लिप्त रहना चाहिए ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न प्रहृष्येत लाभेषु नालाभेषु च चिन्तयेत्।
सम: सर्वेषु भूतेषु सधर्मा मातरिश्वन:॥ ३१॥
अनुवाद
यदि तुम्हें कुछ प्राप्त हो जाए तो अति प्रसन्न मत हो और यदि कुछ न मिले तो भी चिन्ता मत करो। सब प्राणियों के प्रति समभाव रखो। यद्यपि तुम वायु के समान सर्वत्र विचरण करते हो, फिर भी तुम्हें अनासक्त और निर्लिप्त रहना चाहिए ॥31॥
Do not be overjoyed if you gain something and do not worry if you do not gain anything. Have an equal view towards all creatures. Even though you move everywhere like the wind, you should remain detached and unattached. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥