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mahabharat 12.240.27: योगाभ्यासी को चाहिए कि वह उन साधनों को अपनाए जिनसे चंचल मन को वश में किया जा सके और उस साधन से कभी विचलित न हो। 27.   |   mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.240.27 
येनोपायेन शक्येत संनियन्तुं चलं मन:।
तं च युक्तो निषेवेत न चैव विचलेत् तत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
योगाभ्यासी को चाहिए कि वह उन साधनों को अपनाए जिनसे चंचल मन को वश में किया जा सके और उस साधन से कभी विचलित न हो। 27.
 
A practitioner of yoga should adopt the means by which the restless mind can be controlled and he should never be distracted by that means. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)