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mahabharat 12.240.25: दैनिक दिनचर्या का पालन करते हुए, योगी को दिन में तीन बार (सुबह और रात के पहले और आखिरी घंटों में) किसी पहाड़ की चोटी पर स्थित किसी देवता के वृक्ष के पास या किसी एकांत मंदिर में या किसी वृक्ष के सामने बैठकर योग का अभ्यास करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.240.25 
कुर्यात् परिचयं योगे त्रैकाल्ये नियतो मुनि:।
गिरिशृङ्गे तथा चैत्ये वृक्षाग्रेषु च योजयेत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
दैनिक दिनचर्या का पालन करते हुए, योगी को दिन में तीन बार (सुबह और रात के पहले और आखिरी घंटों में) किसी पहाड़ की चोटी पर स्थित किसी देवता के वृक्ष के पास या किसी एकांत मंदिर में या किसी वृक्ष के सामने बैठकर योग का अभ्यास करना चाहिए।
 
Following the daily routine, a Yogi should practice Yoga three times a day (in the morning and in the first and last hours of the night) sitting near a deity tree on the top of a mountain or in a solitary temple or in front of a tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)