Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.240.24: प्रतिभा बढ़ती है। दिव्य सुख स्वतः ही प्रकट होते हैं। योगबल से इन सभी सिद्धियों को प्राप्त करने के बाद भी, तत्त्व को जानने वाले योगी को इनका आदर नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सभी योग में बाधक हैं। अतः उसे इनसे मन हटाकर आत्मा में ध्यान लगाना चाहिए। 24 | mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रतिभा बढ़ती है। दिव्य सुख स्वतः ही प्रकट होते हैं। योगबल से इन सभी सिद्धियों को प्राप्त करने के बाद भी, तत्त्व को जानने वाले योगी को इनका आदर नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सभी योग में बाधक हैं। अतः उसे इनसे मन हटाकर आत्मा में ध्यान लगाना चाहिए। 24
Talent increases. Divine pleasures appear on their own. Even after attaining all these siddhis through the power of yoga, a Yogi who knows the truth should not respect them because all these are obstacles in yoga. Therefore, he should turn his mind away from them and concentrate on the soul. 24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥