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mahabharat 12.240.22: जो योगी प्रतिदिन एकान्त स्थान में एक निश्चित समय तक बैठकर इस प्रकार नियमों का भलीभाँति पालन करते हुए योगाभ्यास करता है, वह अक्षर-ब्रह्म की समता को प्राप्त होता है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.240.22 
एवं परिमितं कालमाचरन् संशितव्रत:।
आसीनो हि रहस्येको गच्छेदक्षरसात्मताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो योगी प्रतिदिन एकान्त स्थान में एक निश्चित समय तक बैठकर इस प्रकार नियमों का भलीभाँति पालन करते हुए योगाभ्यास करता है, वह अक्षर-ब्रह्म की समता को प्राप्त होता है ॥22॥
 
The yogi who sits alone in a secluded place for a fixed time every day and practices yoga in this manner, following the rules properly, attains the equality of Akshar-Brahma. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)