Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.240.20-21: उस आत्मा में सब कुछ दिखाई देता है और सर्वव्यापक होने के कारण वह आत्मा सबमें दिखाई देता है। जो महात्मा ब्राह्मण बुद्धिमान, परमज्ञानी, धैर्यवान और समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, वे ही उस परमात्मा को देख पाते हैं। 20-21॥ | mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वस्तत्र स सर्वत्र व्यापकत्वाच्च दृश्यते॥ २०॥
तं पश्यन्ति महात्मानो ब्राह्मणा ये मनीषिण:।
धृतिमन्तो महाप्राज्ञा: सर्वभूतहिते रता:॥ २१॥
अनुवाद
उस आत्मा में सब कुछ दिखाई देता है और सर्वव्यापक होने के कारण वह आत्मा सबमें दिखाई देता है। जो महात्मा ब्राह्मण बुद्धिमान, परमज्ञानी, धैर्यवान और समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, वे ही उस परमात्मा को देख पाते हैं। 20-21॥
Everyone is visible in that soul and because of its omnipresence, that soul is visible in everyone. Only those Mahatma Brahmins who are wise, highly knowledgeable, patient and always ready for the welfare of all living beings are able to see that Supreme Soul. 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥