Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.240.2-3h: अब मैं योग-संबंधी समस्त क्रियाओं का वर्णन आरंभ करता हूँ, सुनो। तात! योगशास्त्र के अनुसार, इन्द्रियों, मन और बुद्धि को सब ओर से रोककर सर्वव्यापी आत्मा के साथ उनकी एकता स्थापित करना ही सर्वोत्तम ज्ञान है। 2 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योगकृत्यं तु ते कृत्स्नं वर्तयिष्यामि तच्छृणु।
एकत्वं बुद्धिमनसोरिन्द्रियाणां च सर्वश:॥ २॥
आत्मनो व्यापिनस्तात ज्ञानमेतदनुत्तमम्।
अनुवाद
अब मैं योग-संबंधी समस्त क्रियाओं का वर्णन आरंभ करता हूँ, सुनो। तात! योगशास्त्र के अनुसार, इन्द्रियों, मन और बुद्धि को सब ओर से रोककर सर्वव्यापी आत्मा के साथ उनकी एकता स्थापित करना ही सर्वोत्तम ज्ञान है। 2 1/2॥
Now I start describing all the activities related to yoga, listen. Tat! According to Yoga Shastras, the best knowledge is to stop the senses, mind and intellect from all sides and establish their unity with the omnipresent soul. 2 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥