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mahabharat 12.240.19-20h: वह योगी अपने हृदय में आत्मा को धूमरहित अग्नि के समान जलते हुए प्रकाश के समान, तेजस्वी सूर्य को तथा आकाश में चमकती हुई बिजली के समान देखता है । 19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.240.19-20h 
विधूम इव दीप्तार्चिरादित्य इव दीप्तिमान्॥ १९॥
वैद्युतोऽग्निरिवाकाशे दृश्यतेऽऽत्मा तथाऽऽत्मनि।
 
 
अनुवाद
वह योगी अपने हृदय में आत्मा को धूमरहित अग्नि के समान जलते हुए प्रकाश के समान, तेजस्वी सूर्य को तथा आकाश में चमकती हुई बिजली के समान देखता है । 19 1/2॥
 
That Yogi sees in his heart the soul as a light burning like a smokeless fire, the bright sun and the light of lightning flashing in the sky. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)