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mahabharat 12.240.17: प्रयत्नशील साधक को चाहिए कि वह इन पाँचों इन्द्रियों को वश में करके उन्हें अपने मन में स्थापित करे। इसी प्रकार संकल्पों को त्यागकर मन को बुद्धि में एकाग्र करे। 17॥   |   mahabharat अध्याय 12.240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 240: योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.240.17 
तत एतानि संयम्य मनसि स्थापयेद् यति:।
तथैवापोह्य संकल्पान्मनो ह्यात्मनि धारयेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
प्रयत्नशील साधक को चाहिए कि वह इन पाँचों इन्द्रियों को वश में करके उन्हें अपने मन में स्थापित करे। इसी प्रकार संकल्पों को त्यागकर मन को बुद्धि में एकाग्र करे। 17॥
 
A diligent seeker should subdue these five senses and establish them in his mind. Similarly, abandoning the resolutions, concentrate the mind in the intellect. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)