Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.24.d9-18: ‘जो आन्वीक्षिकी (वेदान्त), वेदत्रयी, वार्ता और दण्डनीति में निपुण हैं, उन्हें ही सब कार्यों में नियुक्त करना चाहिए; क्योंकि वे बुद्धि की पराकाष्ठा पर पहुँच गए हैं। कोई व्यक्ति कितना ही प्रतिभाशाली क्यों न हो, विद्वान पुरुष को उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। 18॥ | mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आन्वीक्षिकीत्रयीवार्तादण्डनीतिषु पारगा:।
ते तु सर्वत्र योक्तव्यास्ते च बुद्धे: परं गता:॥ )
गुणयुक्तेऽपि नैकस्मिन् विश्वसेत विचक्षण:॥ १८॥
अनुवाद
‘जो आन्वीक्षिकी (वेदान्त), वेदत्रयी, वार्ता और दण्डनीति में निपुण हैं, उन्हें ही सब कार्यों में नियुक्त करना चाहिए; क्योंकि वे बुद्धि की पराकाष्ठा पर पहुँच गए हैं। कोई व्यक्ति कितना ही प्रतिभाशाली क्यों न हो, विद्वान पुरुष को उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। 18॥
‘Those who are experts in Anvikshiki (Vedanta), Vedatrayee, Varta and Dandanithi should be appointed in all the works; Because they have reached the pinnacle of intelligence. No matter how talented a person is, a learned man should not trust him. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥