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mahabharat 12.24.d4-d5h: इनमें से, धारणा और अनुमान ही सभी के लिए निर्णय का आधार माने गए हैं। धारणा आदि प्रमाणों को जानने वाला व्यक्ति दण्डनीति में कुशल हो सकता है। प्रमाणहीन व्यक्तियों द्वारा प्रयुक्त दण्ड राजा का नाश कर सकता है।   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक d4-d5h
 
 
श्लोक  12.24.d4-d5h 
प्रत्यक्षमनुमानं च सर्वेषां योनिरिष्यते।
प्रमाणज्ञो हि शक्नोति दण्डनीतौ विचक्षण:॥
अप्रमाणवतां नीतो दण्डो हन्यान्महीपतिम्।)
 
 
अनुवाद
इनमें से, धारणा और अनुमान ही सभी के लिए निर्णय का आधार माने गए हैं। धारणा आदि प्रमाणों को जानने वाला व्यक्ति दण्डनीति में कुशल हो सकता है। प्रमाणहीन व्यक्तियों द्वारा प्रयुक्त दण्ड राजा का नाश कर सकता है।
 
‘Among these, Perception and Inference are considered to be the basis of decision for everyone. A person who knows the evidences like Perception etc. can be skilled in the policy of punishment. The punishment used by those who are devoid of evidence can destroy the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)