Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.24.d1-d3: भरतनंदन! प्रत्यक्ष, अनुमान, सादृश्य, अनुमान, अर्थ, ऐतिहासिक, संशय, निर्णय, आकृति, संकेत, गति, प्रयत्न, प्रतिज्ञा, कारण, उदाहरण, उपन्यास और निगमन - इन सबका उद्देश्य प्रमेय सिद्ध करना है। ये सब अनेक वर्गों की कीर्ति के साधन कहे गए हैं। | mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(प्रत्यक्षमनुमानं च उपमानं तथाऽऽगम:।
अर्थापत्तिस्तथैतिह्यं संशयो निर्णयस्तथा॥
आकारो हीङ्गितश्चैव गतिश्चेष्टा च भारत।
प्रतिज्ञा चैव हेतुश्च दृष्टान्तोपनयौ तथा॥
उक्तं निगमनं तेषां प्रमेयं च प्रयोजनम्।
एतानि साधनान्याहुर्बहुवर्गप्रसिद्धये॥
अनुवाद
भरतनंदन! प्रत्यक्ष, अनुमान, सादृश्य, अनुमान, अर्थ, ऐतिहासिक, संशय, निर्णय, आकृति, संकेत, गति, प्रयत्न, प्रतिज्ञा, कारण, उदाहरण, उपन्यास और निगमन - इन सबका उद्देश्य प्रमेय सिद्ध करना है। ये सब अनेक वर्गों की कीर्ति के साधन कहे गए हैं।
'Bharatanandan! Direct, inference, analogy, inference, meaning, historical, doubt, decision, shape, sign, movement, effort, promise, reason, example, novel and deduction - the purpose of all these is to prove the theorem. All these have been said to be a means for the fame of many classes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥