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mahabharat 12.24.6: भरतनंदन! कुन्तीकुमार! पहले भिखारियों, पितरों और देवताओं का ऋण चुकाओ, फिर वह सब करो।   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.24.6 
अर्थिनां च पितॄणां च देवतानां च भारत।
आनृण्यं गच्छ कौन्तेय तत् सर्वं च करिष्यसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! कुन्तीकुमार! पहले भिखारियों, पितरों और देवताओं का ऋण चुकाओ, फिर वह सब करो।
 
'Bharatanandan! Kuntikumar! First repay the debt of the beggars, forefathers and Gods, then do all that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)