Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.24.34: ऋषिगण और विद्वान् पुरुष सदैव उनके प्रशंसनीय और आदरणीय चरित्र की प्रशंसा करते हैं। पुण्यात्मा महापुरुष हयग्रीव स्वर्गलोक को जीतकर वीरों के लिए सुलभ लोकों में पहुँचे और परम सिद्धि को प्राप्त हुए। 34॥ | mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषिगण और विद्वान् पुरुष सदैव उनके प्रशंसनीय और आदरणीय चरित्र की प्रशंसा करते हैं। पुण्यात्मा महापुरुष हयग्रीव स्वर्गलोक को जीतकर वीरों के लिए सुलभ लोकों में पहुँचे और परम सिद्धि को प्राप्त हुए। 34॥
'Sages and learned men always praise his admirable and respectable character. Having won the heavenly world, the virtuous great man Hayagriva reached the worlds accessible to the brave and attained the highest perfection. 34॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि व्यासवाक्ये चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें व्यासवाक्यविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ९ श्लोक मिलाकर कुल ४३ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥