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mahabharat 12.24.26: ‘वह अपने मन को वश में करके युद्धभूमि में शस्त्र लेकर शत्रुओं का संहार कर रहा था; किन्तु लुटेरों ने उसे अपने शस्त्रों से टुकड़े-टुकड़े करके मार डाला। इस समय महामनस्वी हयग्रीव अपने कर्तव्य में तत्पर होकर तृप्तचित्त होकर स्वर्ग में आनन्द मना रहा है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.24.26 
संयुक्तात्मा समरेष्वाततायी
शस्त्रैश्छिन्नो दस्युभिर्वध्यमान:।
अश्वग्रीव: कर्मशीलो महात्मा
संसिद्धार्थो मोदते स्वर्गलोके॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘वह अपने मन को वश में करके युद्धभूमि में शस्त्र लेकर शत्रुओं का संहार कर रहा था; किन्तु लुटेरों ने उसे अपने शस्त्रों से टुकड़े-टुकड़े करके मार डाला। इस समय महामनस्वी हयग्रीव अपने कर्तव्य में तत्पर होकर तृप्तचित्त होकर स्वर्ग में आनन्द मना रहा है॥ 26॥
 
‘Having controlled his mind, he was killing his enemies in the battlefield with weapons in his hands; but the robbers killed him by tearing him to pieces with their weapons. At this time, the great-minded Hayagriva, devoted to his duties, is enjoying himself in heaven with his mind fulfilled.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)