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mahabharat 12.24.20: हे मनुष्यों के स्वामी! जो लोग अनावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से तथा राजा द्वारा रक्षित न होने के कारण चोरों के उपद्रव से नष्ट हो जाते हैं, उनके विनाश का पाप राजा स्वयं उठाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.24.20 
येऽरक्ष्यमाणा हीयन्ते दैवेनाभ्याहता नृप।
तस्करैश्चापि हीयन्ते सर्वं तद् राजकिल्बिषम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जो लोग अनावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से तथा राजा द्वारा रक्षित न होने के कारण चोरों के उपद्रव से नष्ट हो जाते हैं, उनके विनाश का पाप राजा स्वयं उठाता है।
 
'O Lord of men! Those people who get destroyed due to natural calamities like drought etc. and due to the nuisance caused by thieves because they are not protected by the king, the king himself bears the sin of their destruction.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)