Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.24.2-3h: पितामह! राजा युधिष्ठिर! हे भरतश्रेष्ठ! वन में रहते हुए आपके बुद्धिमान भाइयों के मन में जो भी इच्छाएँ उत्पन्न हुई हों, वे सब ये महारथी योद्धा पूरी करें॥ 2 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अरण्ये वसतां तात भ्रातॄणां ते मनस्विनाम्।
मनोरथा महाराज ये तत्रासन् युधिष्ठिर॥ २॥
तानिमे भरतश्रेष्ठ प्राप्नुवन्तु महारथा:।
अनुवाद
पितामह! राजा युधिष्ठिर! हे भरतश्रेष्ठ! वन में रहते हुए आपके बुद्धिमान भाइयों के मन में जो भी इच्छाएँ उत्पन्न हुई हों, वे सब ये महारथी योद्धा पूरी करें॥ 2 1/2॥
'Father! King Yudhishthira! Whatever wishes arose in the minds of your intelligent brothers while they were in the forest, O best of the Bharatas! May these mighty warriors achieve them.॥ 2 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥