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mahabharat 12.24.15: हे पराक्रमी युधिष्ठिर! यदि कोई राजा भाग्यवश किसी कार्य को करने के समय उसे पूरा न कर सके, तो उसमें उसका कोई दोष या अपराध नहीं माना जाता।   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.24.15 
दैवेनाभ्याहतो राजा कर्मकाले महाद्युते।
न साधयति यत् कर्म न तत्राहुरतिक्रमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी युधिष्ठिर! यदि कोई राजा भाग्यवश किसी कार्य को करने के समय उसे पूरा न कर सके, तो उसमें उसका कोई दोष या अपराध नहीं माना जाता।
 
'O mighty Yudhishthira! If a king is struck by destiny and is unable to complete a task at the time of undertaking it, then no fault or crime is attributed to him in that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)