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mahabharat 12.24.10: ‘राजा युधिष्ठिर! धर्म में निपुण पुरुष, द्वेषरहित होकर, विजय की इच्छा रखने वाले राजा के लिए युद्ध की तैयारी करता है।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 24: व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा हयग्रीवका चरित्र सुनाकर उन्हें राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.24.10 
आददानस्य विजयं विग्रहं च युधिष्ठिर।
समानधर्मकुशला: स्थापयन्ति नरेश्वर॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘राजा युधिष्ठिर! धर्म में निपुण पुरुष, द्वेषरहित होकर, विजय की इच्छा रखने वाले राजा के लिए युद्ध की तैयारी करता है।॥10॥
 
‘King Yudhishthira! A person skilled in Dharma, without any negative feelings, sets up a battle for a king who desires to win.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)