Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.239.9: दोनों कान, त्वचा, दोनों नेत्र, जिह्वा और पाँचवाँ नासिका - ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं। इन्हें विषयानुभव के द्वार कहा गया है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.239.9 
कर्णौ त्वक् चक्षुषी जिह्वा नासिका चैव पञ्चमी।
दर्शनीयेन्द्रियोक्तानि द्वाराण्याहारसिद्धये॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दोनों कान, त्वचा, दोनों नेत्र, जिह्वा और पाँचवाँ नासिका - ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं। इन्हें विषयानुभव के द्वार कहा गया है॥9॥
 
Both ears, skin, both eyes, tongue and the fifth nostril – these are the five sense organs. These have been described as the doors of subjective experience.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)