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mahabharat 12.239.4: कृपया विस्तारपूर्वक वह उपाय और तरीका बताइए जिससे मनुष्य अपने मन और इन्द्रियों को एकाग्र कर सकता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.239.4 
मनसश्चेन्द्रियाणां च यथैकाग्रॺमवाप्यते।
येनोपायेन पुरुषैस्तत् त्वं व्याख्यातुमर्हसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कृपया विस्तारपूर्वक वह उपाय और तरीका बताइए जिससे मनुष्य अपने मन और इन्द्रियों को एकाग्र कर सकता है ॥4॥
 
Please explain in detail the means and manner by which a man can concentrate his mind and senses. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)