Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.239.28-29: भगवान् के उस सूक्ष्म रूप से अधिक सूक्ष्म कुछ भी नहीं है और उनसे अधिक स्थूल कुछ भी नहीं है । उनके सब ओर हाथ-पैर हैं, सब ओर नेत्र, सिर और मुख हैं तथा सब ओर कान हैं । वे सब में व्याप्त होकर जगत् में विद्यमान हैं ॥ 28-29॥ | mahabharat अध्याय 12.239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान् के उस सूक्ष्म रूप से अधिक सूक्ष्म कुछ भी नहीं है और उनसे अधिक स्थूल कुछ भी नहीं है । उनके सब ओर हाथ-पैर हैं, सब ओर नेत्र, सिर और मुख हैं तथा सब ओर कान हैं । वे सब में व्याप्त होकर जगत् में विद्यमान हैं ॥ 28-29॥
There is nothing more subtle than that subtle form of God, and there is nothing more gross than Him. He has hands and legs on all sides, eyes, heads and mouths on all sides and ears on all sides. He exists in the world pervading everything.॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥