श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  12.239.27-28h 
यद्यजस्रं समागच्छेद् यथा बाणो गुणच्युत:॥ २७॥
नैवान्तं कारणस्येयाद् यद्यपि स्यान्मनोजव:।
 
 
अनुवाद
चाहे कोई धनुष से छूटे हुए बाण के समान अथवा मनके के समान तीव्र गति से दौड़ता रहे, तो भी वह जगत के कारणरूपी परमेश्वर का अन्त नहीं कर सकता। 27 1/2
 
Even if someone keeps running like an arrow shot from a bow or like a bead with great speed, he can never end the Supreme Being who is the cause of the universe. 27 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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