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mahabharat 12.239.24: जैसे आकाश में पक्षियों के और जल में मछलियों के पदचिह्न नहीं देखे जा सकते, वैसे ही बुद्धिमान पुरुषों की गति को कोई नहीं जान सकता ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.239.24 
शकुन्तानामिवाकाशे मत्स्यानामिव चोदके।
यथा गतिर्न दृश्येत तथा ज्ञानविदां गति:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जैसे आकाश में पक्षियों के और जल में मछलियों के पदचिह्न नहीं देखे जा सकते, वैसे ही बुद्धिमान पुरुषों की गति को कोई नहीं जान सकता ॥24॥
 
Just as the footprints of birds in the sky and fish in water cannot be seen, similarly no one can know the movements of wise men. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)