| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 239: ज्ञानका साधन और उसकी महिमा » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 12.239.15  | एवं सप्तदशं देहे वृतं षोडशभिर्गुणै:।
मनीषी मनसा विप्र: पश्यत्यात्मानमात्मनि॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार बुद्धिमान ब्राह्मण इस शरीर में पाँच इन्द्रियाँ, पाँच विषय, प्रकृति, चेतन, मन, प्राण, अपान और जीव इन सोलह तत्त्वों से आवृत होकर अपनी बुद्धि के द्वारा सत्रहवें भगवान् का साक्षात्कार करता है ॥15॥ | | | | In this way, an intelligent Brahmin, in this body, realizes the seventeenth God through his intellect, covered with the sixteen elements of five senses, five objects, nature, consciousness, mind, life, apana and jiva. 15॥ | | ✨ ai-generated | | |
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