Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.238.20: यह काल नामक तत्त्व ही प्राणियों की उत्पत्ति, पालन, संहार और नियंत्रण करने वाला है। इसमें असंख्य द्वैतभाव वाले प्राणी स्वभाव से ही निवास करते हैं। 20॥ | mahabharat अध्याय 12.238: नाना प्रकारके भूतोंकी समीक्षापूर्वक कर्मतत्त्वका विवेचन, युगधर्मका वर्णन एवं कालका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह काल नामक तत्त्व ही प्राणियों की उत्पत्ति, पालन, संहार और नियंत्रण करने वाला है। इसमें असंख्य द्वैतभाव वाले प्राणी स्वभाव से ही निवास करते हैं। 20॥
This element called Kaal is the one who creates, nurtures, destroys and controls living beings. Innumerable beings with duality reside in it by their very nature. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥