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mahabharat 12.237.8: बेटा! चेतन प्राणी खेलने के लिए स्थान और रहने के लिए घर बनाते हैं। वे ही रोगों का निदान करते हैं और उन पर उचित औषधि लगाते हैं। ये सभी कार्य बुद्धिमान पुरुष ही उचित रीति से (स्वभाव से - स्वयं नहीं) करते हैं।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.237.8 
आक्रीडानां गृहाणां च गदानामगदस्य च।
प्रज्ञावन्त: प्रयोक्तारो ज्ञानवद्भिरनुष्ठिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
बेटा! चेतन प्राणी खेलने के लिए स्थान और रहने के लिए घर बनाते हैं। वे ही रोगों का निदान करते हैं और उन पर उचित औषधि लगाते हैं। ये सभी कार्य बुद्धिमान पुरुष ही उचित रीति से (स्वभाव से - स्वयं नहीं) करते हैं।॥8॥
 
Son! Conscious beings make places for playing and houses for living. They are the ones who diagnose diseases and apply the right medicine on them. All these tasks are performed in the right way (by nature – not on their own) by intelligent men only.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)