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mahabharat 12.237.7: संसार में देखा जाता है कि भूमि जोतना, अन्न के बीज एकत्रित करना, सवारी करना, बैठना और मकान बनाना - ये सब कार्य सदैव बुद्धिमान चेतन प्राणी ही करते हैं। यदि ये कार्य प्रकृति द्वारा किए जाते, तो कोई भी इनमें लिप्त न होता॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.237.7 
कृष्यादीनीह कर्माणि सस्यसंहरणानि च।
प्रज्ञावद्भि: प्रक्लृप्तानि यानासनगृहाणि च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
संसार में देखा जाता है कि भूमि जोतना, अन्न के बीज एकत्रित करना, सवारी करना, बैठना और मकान बनाना - ये सब कार्य सदैव बुद्धिमान चेतन प्राणी ही करते हैं। यदि ये कार्य प्रकृति द्वारा किए जाते, तो कोई भी इनमें लिप्त न होता॥7॥
 
It is seen that in the world, the work of plowing the land, collecting seeds of grains and riding, sitting and building houses - all these works are always done by intelligent conscious beings. If these things were done by nature then no one would have indulged in them. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)