Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.237.4: जो लोग ऐसा मानते हैं कि वस्तुगत प्रकृति ही निश्चयपूर्वक जगत् का कारण है और प्रकृति के अतिरिक्त अन्य कोई कारण नहीं है, (परन्तु उनका यह मानना कि जगत् का कारण ईश्वर के समान कोई नहीं है, केवल इसलिए कि वह इन्द्रियों द्वारा उपलब्ध नहीं है, युक्तिसंगत नहीं है; क्योंकि) क्या सरकंडे को चीरने पर सरकंडे के भीतर स्थित अदृश्य काँटा उन्हें उपलब्ध नहीं होता? बल्कि वह उपलब्ध होता है (इसी प्रकार, यद्यपि सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त परमात्मा इन्द्रियों से दिखाई नहीं देता, तथापि वह दिव्य ज्ञान द्वारा अवश्य उपलब्ध होता है)।॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येषां चैकान्तभावेन स्वभावात् कारणं मतम्।
पूत्वा तृणमिषीकां वा ते लभन्ते न किंचन॥ ४॥
अनुवाद
जो लोग ऐसा मानते हैं कि वस्तुगत प्रकृति ही निश्चयपूर्वक जगत् का कारण है और प्रकृति के अतिरिक्त अन्य कोई कारण नहीं है, (परन्तु उनका यह मानना कि जगत् का कारण ईश्वर के समान कोई नहीं है, केवल इसलिए कि वह इन्द्रियों द्वारा उपलब्ध नहीं है, युक्तिसंगत नहीं है; क्योंकि) क्या सरकंडे को चीरने पर सरकंडे के भीतर स्थित अदृश्य काँटा उन्हें उपलब्ध नहीं होता? बल्कि वह उपलब्ध होता है (इसी प्रकार, यद्यपि सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त परमात्मा इन्द्रियों से दिखाई नहीं देता, तथापि वह दिव्य ज्ञान द्वारा अवश्य उपलब्ध होता है)।॥4॥
Those who believe that objective nature is definitely the cause of the universe and there is no other cause apart from nature, (but their belief that there is no cause of the universe like God, just because it is not available through the senses, is not logical; because) is the invisible thorn situated inside the reed not available to them after splitting the reed? Rather it is available (in the same way, although the Supreme Soul pervading the entire universe is not visible to the senses, yet He is certainly available through divine knowledge).॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥