Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.237.3: व्यासजी बोले - जो यह समझता है कि यह जगत् प्रकृति से ही उत्पन्न हुआ है और इसका कोई चेतन मूल कारण नहीं है, वह अज्ञानी पुरुष व्यर्थ तर्क से युक्त बुद्धि से बार-बार तर्कहीन वचनों का पोषण करता रहता है। ॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
यस्तु पश्यन् स्वभावेन विनाभावमचेतन:।
पुष्यते च पुन: सर्वान् प्रज्ञया मुक्तहेतुकान्॥ ३॥
अनुवाद
व्यासजी बोले - जो यह समझता है कि यह जगत् प्रकृति से ही उत्पन्न हुआ है और इसका कोई चेतन मूल कारण नहीं है, वह अज्ञानी पुरुष व्यर्थ तर्क से युक्त बुद्धि से बार-बार तर्कहीन वचनों का पोषण करता रहता है। ॥3॥
Vyasa said, "He who thinks that this world has arisen from nature itself and that it has no conscious root cause, that ignorant man keeps on nurturing reasonless words again and again with his intellect full of futile logic." ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥