Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.237.25: वे जन्म, मृत्यु और कर्म की सीमाओं से सर्वथा परे हैं और चतुर्विध जीवों के परमेश्वर और स्वयंभू हैं ॥25॥ | mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे जन्म, मृत्यु और कर्म की सीमाओं से सर्वथा परे हैं और चतुर्विध जीवों के परमेश्वर और स्वयंभू हैं ॥25॥
He has completely crossed the limits of birth, death and karma and is the Supreme Lord and Swayambhu of all the fourfold living beings. 25॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शुकानुप्रश्ने सप्तत्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका अनुप्रश्नविषयक दो सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥