Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.237.23: बेटा! जो लोग ज्ञानवान हो जाते हैं और अपने अन्दर और बाहर स्थित अधियज्ञ (ईश्वर) और अधिदैव (पुरुष) को जान लेते हैं, वे ही देवता हैं और वे ही द्विज हैं। | mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्त:स्थं च बहिष्ठं च साधियज्ञाधिदैवतम्।
ज्ञानान्विता हि पश्यन्ति ते देवास्तात ते द्विजा:॥ २३॥
अनुवाद
बेटा! जो लोग ज्ञानवान हो जाते हैं और अपने अन्दर और बाहर स्थित अधियज्ञ (ईश्वर) और अधिदैव (पुरुष) को जान लेते हैं, वे ही देवता हैं और वे ही द्विज हैं।
Son! Those who become knowledgeable and realize the Adhiyagya (God) and Adhidaiva (Purusha) present inside and outside, they are the gods and they are the Dwijas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥