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ब्रह्मज्ञानप्रतिष्ठं हि तं देवा ब्राह्मणं विदु:।
शब्दब्रह्मणि निष्णातं परे च कृतनिश्चयम्॥ २२॥
अनुवाद
जो शब्दब्रह्म (वेद) में पारंगत हो गया है और जिसने परब्रह्म के तत्व का निश्चय कर लिया है तथा जो सदैव ब्रह्मज्ञान में स्थित रहता है, वही देवताओं द्वारा ब्राह्मण माना जाता है।
The one who has become proficient in the Shabdabraham (Veda) and has decided on the essence of Parabrahma and always remains situated in the knowledge of Brahma, only he is considered a Brahmin by the gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥