श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.237.21 
धर्मद्वयं हि यो वेद स सर्वज्ञ: स सर्ववित्।
स त्यागी सत्यसंकल्प: सत्य: शुचिरथेश्वर:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो स्वभाव और निवृत्ति नामक दो प्रकार के धर्मों को जानता है, वह सर्वज्ञ, सर्वज्ञ, त्यागी, दृढ़ निश्चयी, सत्यवादी, शुद्ध और शक्तिशाली है ॥21॥
 
The one who knows the two types of dharma, namely nature and withdrawal, is omniscient, omniscient, renunciant, determined, truthful, pure and powerful. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)