Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.237.2: शुकदेवजी ने पूछा - पिताजी ! वह कौन-सा ज्ञान या विद्या है जिससे मनुष्य जन्म-मरण दोनों के बंधनों से मुक्त हो जाता है ? क्या वह स्वभावगत धर्म है या निवृत्ति है ? यह मुझे बताइए ॥2॥ | mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुकदेवजी ने पूछा - पिताजी ! वह कौन-सा ज्ञान या विद्या है जिससे मनुष्य जन्म-मरण दोनों के बंधनों से मुक्त हो जाता है ? क्या वह स्वभावगत धर्म है या निवृत्ति है ? यह मुझे बताइए ॥2॥
Shukdevji asked – Father! What is that knowledge or education by which man gets liberated from the bondage of both birth and death? Is it a religion of nature or a form of retirement? Tell me this. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥