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mahabharat 12.237.17: धर्म को जानने वाले दो प्रकार के लोग हैं - वे जो वेदों को जानते हैं और वे जो वेदों को नहीं जानते। उनमें वेदों को जानने वाले श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वेद उनमें प्रतिष्ठित हैं।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.237.17 
धर्मज्ञानि द्वयान्याहुर्वेदज्ञानीतराणि च।
वेदज्ञानि विशिष्टानि वेदो ह्येषु प्रतिष्ठित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
धर्म को जानने वाले दो प्रकार के लोग हैं - वे जो वेदों को जानते हैं और वे जो वेदों को नहीं जानते। उनमें वेदों को जानने वाले श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वेद उनमें प्रतिष्ठित हैं।॥17॥
 
There are two kinds of people who know the religion - those who know the Vedas and those who do not know the Vedas. Among them, those who know the Vedas are superior because the Vedas are established in them.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)