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mahabharat 12.237.16: दो प्रकार के मध्यम पुरुष हैं - वे जो धर्म को जानते हैं और वे जो धर्म को नहीं जानते। इनमें धर्म को जानने वाले श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वे उचित-अनुचित का विवेक करके अपने कर्तव्य का पालन करते हैं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.237.16 
मध्यमानि द्वयान्याहुर्धर्मज्ञानीतराणि च।
धर्मज्ञानि विशिष्टानि कार्याकार्योपधारणात्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
दो प्रकार के मध्यम पुरुष हैं - वे जो धर्म को जानते हैं और वे जो धर्म को नहीं जानते। इनमें धर्म को जानने वाले श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वे उचित-अनुचित का विवेक करके अपने कर्तव्य का पालन करते हैं॥16॥
 
There are two types of middle men - those who know Dharma and those who do not know Dharma. Among them, those who know Dharma are the best because they discriminate between what is right and what is wrong and follow their duties.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)