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mahabharat 12.237.13: गतिशील प्राणियों में दो प्रकार के प्राणी होते हैं - अनेक पैरों वाले और दो पैरों वाले। इनमें से कई दो पैरों वाले प्राणियों को अनेक पैरों वाले प्राणियों से श्रेष्ठ बताया गया है।   |   mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.237.13 
आहुर्वै बहुपादानि जङ्गमानि द्वयानि तु।
बहुपाद्भॺो विशिष्टानि द्विपदानि बहून्यपि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
गतिशील प्राणियों में दो प्रकार के प्राणी होते हैं - अनेक पैरों वाले और दो पैरों वाले। इनमें से कई दो पैरों वाले प्राणियों को अनेक पैरों वाले प्राणियों से श्रेष्ठ बताया गया है।
 
Among the mobile creatures, there are two kinds of creatures - those with many legs and those with two legs. Among these, many creatures with two legs are said to be better than those with many legs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)