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mahabharat 12.237.11: हमें संसार में चारों प्रकार के प्राणियों - भ्रूण, अण्डा, संतति और भ्रूण - के जन्म की ओर भी लक्ष्य रखना चाहिए । 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 237: सृष्टिके समस्त कार्योंमें बुद्धिकी प्रधानता और प्राणियोंकी श्रेष्ठताके तारतम्यका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.237.11 
भूतानां जन्म सर्वेषां विविधानां चतुर्विधम्।
जरायुजाण्डजोद्भिज्जस्वेदजं चोपलक्षयेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हमें संसार में चारों प्रकार के प्राणियों - भ्रूण, अण्डा, संतति और भ्रूण - के जन्म की ओर भी लक्ष्य रखना चाहिए । 11॥
 
We should also aim towards the birth of all the four types of beings in the world – the various types of embryos, eggs, offspring and embryos. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)